
ज़ीरकपुर : किआ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन (आईपीसीए) के सहयोग से ज़ीरकपुर स्थित पार्क प्लाज़ा होटल में प्रोजेक्ट डी.आर.ओ.पी. (डेवलप रिस्पॉन्सिबल आऊटलुक फॉर प्लास्टिक) के तीसरे चरण का समापन कार्यक्रम और पैनल संगोष्ठी का आयोजन किया।
यह कार्यक्रम पंजाब के ट्राई-सिटी क्षेत्र (चंडीगढ़, पंचकूला और ज़ीरकपुर) में प्रोजेक्ट डी.आर.ओ.पी. के तीसरे चरण की सफल समाप्ति का प्रतीक रहा। यह किआ इंडिया की प्रमुख सीएसआर पहल है, जिसका उद्देश्य प्लास्टिक के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना, कचरा प्रबंधन प्रणाली को शसक्त बनाना और समुदायों को पर्यावरण सरंक्षण से जोड़ना है।

कार्यक्रम में सरकारी विभागों, नगर निगमों, उद्योग जगत, सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदायों के प्रतिनिधियों सहित 200 से अधिक लोगों ने भाग लिया। ट्राई-सिटी क्षेत्र के 211 रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए), स्कूलों, कॉलेजों और संस्थानों को सम्मानित किया गया।
पैनल संगोष्ठी में कृष्णकांत सिंगला, प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी, पंजाब राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, राजवीर वालिया, महासचिव, सिल्वर सिटी थीम्स, ज़ीरकपुर, भवनप्रीत कौर, सहायक प्रोफेसर, इको-क्लब कोऑर्डिनेटर, जीजेआईएमटी, मोहाली और कर्नल दलबीर सिंह, महाप्रबंधक, प्रशिक्षण, परियोजना एवं परामर्श, एमजीएसआईपीए, चंडीगढ़ सहित कई प्रख्यात वक्ताओं ने भाग लिया। सत्र का संचालन आईपीसीए की जनरल मैनेजर डॉ. रीना चड्ढा ने किया। संगोष्ठी में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन चुनौतियों से निपटने में शहरी स्थानीय निकायों की क्षमता को मजबूत करने के लिए सहयोगात्मक मॉडल, नीतिगत समर्थन और सामुदायिक भागीदारी पर ध्यान केंद्रित किया गया।
इस अवसर पर किआ इंडिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (सेल्स एंड मार्केटिंग) अतुल सूद ने कहा किसस्टेनेबिलिटी किआ इंडिया की दीर्घकालिक रणनीति का प्रमुख स्तंभ है। प्रोजेक्ट डी.आर.ओ.पी. के माध्यम से हम समुदाय स्तर पर व्यवहार परिवर्तन लाने और मजबूत कचरा प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह समापन केवल एक चरण की समाप्ति नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयासों का उत्सव है और भविष्य के विस्तार की मजबूत नींव रखता है।
आईपीसीए के सचिव अजय गर्ग ने कहा कि यह परियोजना उद्योग, समाज और सरकारी संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों का बेहतरीन उदाहरण है, जिससे स्थायी पर्यावरणीय प्रभाव उत्पन्न हो रहा है।आईपीसीए की जनरल मैनेजर डॉ. रीना चड्ढा ने बताया कि यह परियोजना 1 जनवरी 2023 को पांच शहरों से शुरू हुई थी और अब आठ शहरों तक फैल चुकी है। अब तक 1100 से अधिक संस्थान इससे जुड़ चुके है और दिसंबर 2025 तक कुल 14,284 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरे का संग्रहण किया गया है।
कार्यक्रम के अंत में किआ इंडिया और आईपीसीए ने इस पहल को अन्य शहरों में विस्तार देने और अगले चरणों को और अधिक प्रभावी बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

